Wednesday, 21 October 2026

Naadinee

  1. Naadinee is a female-centric novel that highlights the strength and central role of women. 
  2. It deeply portrays the emotional pain, struggles, and silent suffering that women endure in society. ​
  3. The story sheds light on her sacrifices, resilience, and inner journey through difficult times. 
  4. It serves as a poignant reflection on women's experiences, giving a voice to their unspoken agony.

Kaliyuga ka Kurukshetra

​"Kaliyuga ka Kurukshetra" is a gripping novel that bridges ancient epic lore with the modern age. It explores the timeless battle between righteousness and moral decay, reflecting the chaos of today's world. Through powerful characters and intense conflict, the story reveals how modern humanity faces its own inner battles. Ultimately, it delivers a thought-provoking perspective on destiny, dharma, and duty in the age of Kaliyuga.

64 Yogini 'Brahmanvdiya Urja Ki Alaukik Shakti'

The 64 Yoginis represent the mystical, divine feminine powers (Shakti) that govern and sustain the energy of the universe.
​As manifestations of supreme consciousness, they embody deep spiritual wisdom and divine energy.
​Venerated in Tantric tradition, these goddesses are worshipped for spiritual awakening, ultimate protection, and inner strength.
​Their collective cosmic force bridges the earthly realm with transcendental spiritual power, guiding seekers toward higher consciousness.

Thursday, 13 August 2026

राजनीतिक दिवालियापन

संसद भवन के बाहर और राजनीतिक मंचों पर जो कुछ भी देखने को मिला, उसने देश के हर उस नागरिक को झकझोर कर रख दिया है, राहुल गांधी और संदीप दीक्षित द्वारा मेलोनी का अपमान और संसद के बाहर पवन खेड़ा का बंदर के साथ प्रदर्शन महज़ राजनीतिक स्टंट नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से राजनीतिक दिवालियापन का प्रमाण हैं।

​क्या बचा है राजनीति की गरिमा का?
​कभी हमारे देश की राजनीति में वैचारिक मतभेद होते थे, नीतियों पर बहस होती थी और संसद को सर्वोच्च चर्चा का केंद्र माना जाता था। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है। विरोध के नाम पर जिस तरह की ड्रामेबाजी और प्रतीकात्मकता का सहारा लिया जा रहा है, वह न केवल बचकानी है बल्कि देश की महान लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।

​देश का आम नागरिक आज महंगाई, रोजगार, और देश की प्रगति जैसे गंभीर विषयों पर बात सुनना और देखना चाहता है। लेकिन इसके विपरीत, राजनीतिक दल अपनी क्षुद्र महत्वाकांक्षाओं के लिए तमाशा खड़ा करने में व्यस्त हैं।

​आहत है आम हिंदुस्तानी की भावना
​आज सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक सब के मन में एक ही सवाल है - क्या हमारी राजनीति का स्तर यही रह गया है?
​देश की जनता सब देख रही है। वह जानती है कि कौन देश को आगे ले जाने की बात कर रहा है और कौन सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए ड्रामे रच रहा है। इस तरह के कृत्य जनता के बीच राजनेताओं की विश्वसनीयता के ताबूत में आखिरीकील साबित हो रहे हैं। 

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन आज आवश्यकता इस बात की है कि हर जागरूक नागरिक अपनी आवाज़ उठाए और इन नेताओं को आईना दिखाए।

​"जब राजनीति तमाशा बन जाए, तो जनता को खुद निर्देशक बनना पड़ता है।" ​आइए, इस ओछी और स्तरहीन राजनीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। इन नेताओं को यह अहसास कराना होगा कि देश की जनता इनकी नौटंकी से ऊब चुकी है। अब हमें गंभीर, जिम्मेदार और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली राजनीति की जरूरत है, न कि इस तरह के राजनीतिक दिवालियापन की।
​#PoliticalBankruptcy #IndianPolitics #bjp #inc #media

Monday, 29 June 2026

64 Yogini Brahmandiya Urja Ki Aloukik Shakti

Mystical & Powerful 10 years. One secret. Finally revealed.

Are they just stone idols in ancient temples... 
Or the living cosmic forces running the universe even today? 

Ancient Tantra meets Quantum Physics.

For the first time, the hidden truth comes out. Are you ready for your inner journey? 

#RajeshPandey #64Yogini #SpiritualJourney
#TantraScience #CosmicEnergy #NewBook  #Adhyatma

Tuesday, 15 July 2025

मैं कान हूं

हम दो भाई, जन्म से संग, पर मिलते नहीं कभी।
विपरीत दिशा में मुख हैं, किस्मत की ये कैसी ठगी!
हमारा काम बस सुनना, सुनते हर बात पुरानी,
बुरे बोल या मीठी बातें, सब कानों से जानी।
हुक बन गए धीरे-धीरे, चश्मे का बोझ उठाया,
आँखों का साथ निभाने में, हमें ही दर्द में पाया।
कहते नहीं तो क्या हुआ, सुनते तो सब कुछ हैं?
बोलने वालों की जय-जयकार, क्या हम बस यूँ ही फालतू हैं?
बचपन में खींचे गए हम, जब बात समझ ना आई,
बड़े हुए तो सज गए, पर तारीफ चेहरे ने पाई।
बालियाँ, झुमके, नथनी, सब हम पर लटके,
पर सुंदरता का श्रेय, बस आँखों-होठों को भटके।
काजल, लाली, क्रीम-पाउडर, चेहरे पर ही लगते हैं,
क्या हमने कभी कुछ माँगा? क्यों हम उपेक्षित रहते हैं?
जैसे ब्याह की बची पूरी, किनारे हम चिपका दिए,
बालों से कट भी जाए तो, डेटॉल से चुप करा दिए।
दर्द बांटने से घटता है, पर किसको हम ये बताएं?
आँखें तो बस रो देंगी, नाक बहने लग जाए।
मुँह चीखने लगेगा, दर्द हमारा समझ न पाएगा,
जनेऊ, पेंसिल, गुटखा, मोबाइल, सब बोझ हमीं उठाएगा।
अब मास्क का नया झमेला, हम ही इसे सहते हैं,
कान नहीं, हम तो बस, हुक बनकर रहते हैं।
जो कुछ भी और टाँगना हो, ले आओ, भैया,
हम तैयार हैं, और सहने को, बन कर मजबूत हुक का सैया।

Thursday, 26 October 2023

Mere Khatu Shyam

मात मोरबी पिता घटोत्कच, बर्बरीक है जिसका नाम... !
सिर खाटू में धड़ हिसार में, वो हैं मेरे खाटू श्याम... !!

हारे का सहारा, खाटू श्याम
अति बलशाली, खाटू श्याम
भीम पौत्र हैं, खाटू श्याम
बीर-बहादुर, खाटू श्याम

अंजन और मेघ के भ्राता,  योद्धा बड़े महान... !
तीन वाण रखने वाले के, हाथ में तीर कमान... !!
वो हैं मेरे खाटू श्याम.....2

शीश के दानी, खाटू श्याम
देवी के उपासक, खाटू श्याम
दान-वीर हैं, खाटू श्याम
श्रेष्ठ धनुर्धर, खाटू श्याम

सच्ची श्रद्धा प्रेम भाव से, जप ले श्याम का नाम... ! 
दुःख दर्द मिटे हर काम बने, जन हो जाए धनवान... !! 
वो हैं मेरे खाटू श्याम.....2

        > डॉ राजेश पाण्डेय